राममंदिर निर्माण, प्राण प्रतिष्ठा के लिये संतो ने नरेन्द्र मोदी को श्रेय देते हुए आभार जताया अयोध्या की तरह मथुरा में भी अतिक्रमण मुक्त हो श्रीकृष्ण जन्मभूमि, बने भव्य मंदिर – देवकीनंदन महाराज
उन्होंने ने ये भी कहा अश्लील वेब सीरीज कर रही सनातन संस्कृति को नष्ट, रोक लगे, ईशनिंदा कानून लागू हो

दिल्ली/मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिकरण के संकल्प के साथ देवकीनंदन महाराज द्वारा दिल्ली में आयोजित ‘सनातन संत संसद’ में जगद्गुरू शंकराचार्य, प्रख्यात कथाकार, संत-महंत, महामंडलेश्वर, अधिवक्ताओं ने ‘सनातन धर्म’ की वर्तमान चुनौतियों और आगामी रणनीति पर अपने विचार रखे । धर्माचार्यों ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा के लिये एकमत से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को श्रेय देते हुये आभार पत्र जारी किया । वहीं मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर को अतिक्रमण मुक्त कराने सहित पाँच मुख्य माँगे भी रखीं ।

संत संसद में रखीं ये 5 माँगें –

  1. देवकीनंदन महाराज ने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्तिकरण एवं आगरा जामा मस्जिद से केशव देव प्रतिमाओं की वापसी,

2. देश में ईशनिंदा कानून की आवश्यकता एवं रामायण-गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ के रूप में मान्यता,

3. सनातनी मंदिरों से सरकारी नियंत्रण से छूट तथा मंदिर कोष द्वारा गुरूकुलम एवं सनातनी शिक्षा की व्यवस्था,

4. जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने तथा सनातनी युवक-युवतियों को विवाह हेतु धर्मान्तरण पर रोक,

5. समाज को पथभ्रष्ट एवं चरित्र नाश करने वाले अश्लील चलचित्र / गीत / वेब सीरीज पर रोक लगाने के पाँच मुद्दे संतो के सामने रखे, जिन पर धर्माचार्यों ने अपनी सहमती जताते हुये अपने विचार प्रकट किये ।

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि केवल व्हाटसएप पर ही सनातनी बनने से काम नहीं चलेगा । जिस तरह से सनातन धर्म और ग्रंथों पर मनमानी टिप्पणी करने की आजादी मिल रही है, ईषनिंदा कानून लागू करके इस पर रोक लगानी चाहिये ।

ये रहे उपस्थित, किया सम्बोधित –

आचार्य कौशिक महाराज, महामण्डलेश्वर स्वामी यतिदानंद, दाती महाराज, स्वामी श्री चिदंबरानन्द, चेतन अरुणपुरी, नवलगिरी महाराज, शिवप्रेमानद महाराज, जितेंद्रजी महाराज, कृष्णानन्द महाराज, स्वामी श्रीजी महाराज, आदित्यनंद महाराज, नवल किशोरी दास, यतींद्रानंद महाराज, एडवोकेट श्री विष्णु शंकर जैन, धर्मरक्षा संघ के सौरभ गौड़, महंत मोहिनी बिहारी शरण, श्री हरिदास, दिवाकर पुरी, दीनबन्धुदास जी महाराज, स्वामी सत्यमित्रानंद, महंत फूलडोल बिहारीदास, गोपालशरण देवाचार्य महाराज सहित दजर्नों संत-मंहत, कथाकार एवं धर्माधिकारी उपस्थित रहे ।

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